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श्रावण मास की दिव्य महिमा एवं रुद्राभिषेक का विशेष फल

महादेव का प्रिय पावन महीना, सोमवार व्रत का पुण्य एवं समस्त मनोरथ सिद्धि का अवसर

पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण (सावन) का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसी पावन मास में माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया था। समुद्र मंथन के समय हलाहल विष को अपने कंठ में धारण करने वाले नीलकंठ महादेव की तपन को शांत करने हेतु देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था।

सावन के सोमवार व्रत का महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध व बेलपत्र चढ़ाने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों के दांपत्य जीवन में अखंड सौभाग्य का वास होता है। पुरुषों को आजीविका, व्यवसाय व स्वास्थ्य में अप्रत्याशित उन्नति मिलती है।

रुद्राभिषेक के विविध द्रव्यों का फल

शिवपुराण के अनुसार भिन्न-भिन्न द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक करने से जातक को विशिष्ट फल प्राप्त होते हैं:

  • गंगाजल: जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति, मानसिक शांति एवं घर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार।
  • गाय का कच्चा दूध: आरोग्य, दीर्घायु एवं संतान सुख की प्राप्ति।
  • गन्ने का रस: आर्थिक तंगी, कर्ज से मुक्ति एवं व्यापारिक समृद्धि।
  • शहद व घी: असाध्य व्याधियों का नाश और शारीरिक कांति में वृद्धि।
  • सुगंधित इत्र व चंदन: समाज में सम्मान, यश एवं आकर्षण शक्ति में वृद्धि।

माँ गुरु आश्रम में सावन अनुष्ठान

श्रावण मास में गंडक नदी के पावन तट पर स्थित माँ गुरु आश्रम, डुमरिया घाट में पूरे माह निरंतर वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्री पाठ एवं सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सावन सोमवार के व्रत में दिनभर फलाहार, दूध, फल अथवा एक समय सेंधा नमक युक्त सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। अन्न, प्याज, लहसुन व तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग अनिवार्य है।

गंगाजल से मोक्ष व शांति, गाय के कच्चे दूध से सुयोग्य संतान व स्वास्थ्य, गन्ने के रस से लक्ष्मी व धन वृद्धि तथा शहद से पापों का शमन और वाणी में ओज प्राप्त होता है।
महर्षि आलोक आनंद
लेखक: पूज्य महर्षि आलोक आनंद जी

संस्थापक – माँ गुरु आश्रम, डुमरिया घाट (गोपालगंज, बिहार)

वैदिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक एवं शिव आराधना के मर्मज्ञ।