कॉल करें WhatsApp

वास्तु शास्त्र परामर्श: गृह एवं व्यावसायिक वास्तु दोष निवारण

❖

वास्तु: प्रकृति एवं ऊर्जा का संतुलन

वास्तु शास्त्र सनातन स्थापत्य वेद का अंग है। इसका मूल उद्देश्य प्रकृति के पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) तथा सूर्य व चुंबकीय ऊर्जा का भवन की संरचना के साथ ऐसा सामंजस्य स्थापित करना है, जिससे वहाँ निवास करने वालों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो।

वास्तु दोष के प्रमुख संकेत व लक्षण

यदि आपके घर अथवा कार्यस्थल में वास्तु दोष विद्यमान है, तो जातक को प्रायः निम्न संकेत प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अनुभव होते हैं:

  • निरंतर आर्थिक तंगी: धन का आगमन होने के उपरांत भी अनायास व्यर्थ खर्चों या बीमारी में बह जाना।
  • परिवार में अकारण विवाद: पति-पत्नी में तनाव, भाइयों में मतभेद अथवा परिजनों में मानसिक अशांति।
  • व्यापार में मंदी: ग्राहकों की कमी, निर्मित माल का न बिकना अथवा कर्मचारियों का टिक न पाना।
  • अनिद्रा व भारीपन: घर में प्रवेश करते ही सिर में भारीपन, नकारात्मक विचार अथवा भय महसूस होना।

वास्तु परामर्श के प्रमुख क्षेत्र

आवासीय वास्तु (Residential)

मुख्य द्वार, पूजा घर (ईशान), रसोई (आग्नेय), शयनकक्ष (नैऋत्य) एवं जल स्थान की सही दिशा का निर्धारण।

व्यावसायिक वास्तु (Commercial)

दुकान, शोरूम, रेस्टोरेंट एवं कार्यालय में कैश काउंटर, स्वामी की बैठक व मुख्य प्रवेश द्वार का संतुलन।

औद्योगिक वास्तु (Industrial)

फैक्ट्री, गोदाम व प्लांट में भारी मशीनों, बॉयलर, विद्युत उपकरण व कच्चा माल भंडारण का वास्तु विधान।

भूखंड एवं प्लॉट चयन

नया मकान अथवा दुकान बनाने से पूर्व भूमि की ऊर्जा, दिशा, मिट्टी की गुणवत्ता एवं ढलान का परीक्षण।

बिना तोड़-फोड़ के सात्विक वास्तु निवारण

कई बार बने-बनाए भवन में निर्माण को तोड़ना संभव अथवा आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होता। पूज्य महर्षि आलोक आनंद जी की विशेषता है कि वे अधिकांश मामलों में बिना किसी तोड़-फोड़ के सात्विक एवं शास्त्रीय उपायों द्वारा ऊर्जा का संतुलन स्थापित करते हैं:

  • पंचतत्व संतुलन: रंग, प्रकाश और दिशाओं के सही उपयोग द्वारा तत्वों का शोधन।
  • वैदिक यंत्र स्थापना: वास्तु पुरुष यंत्र, श्रीयंत्र अथवा दिशा रक्षक यंत्रों की प्राण-प्रतिष्ठा।
  • ऊर्जा शोधन: आश्रम द्वारा प्रदत्त सात्विक धूप, समुद्री नमक व गंगाजल मार्जन विधान।

वास्तु परामर्श प्रक्रिया

  1. मानचित्र (Layout) साझा करें: अपने मकान, दुकान या फैक्ट्री का दिशा-अंकित नक्शा व्हाट्सएप करें।
  2. समस्या का विवरण दें: जो मुख्य कष्ट या बाधाएं अनुभव हो रही हैं, उन्हें संक्षेप में बताएं।
  3. विश्लेषण एवं निदान सत्र: महर्षि जी नक्शे का परीक्षण कर दिशा दोषों को चिन्हित करते हैं और व्यावहारिक निवारण बताते हैं।
  4. साइट विजिट (आवश्यकतानुसार): बड़े व्यावसायिक अथवा औद्योगिक प्रोजेक्ट्स हेतु पूर्व अनुमति से आश्रम टीम का प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण भी संभव है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हाँ, जहाँ व्यक्ति निवास करता है और श्वास लेता है, उस स्थान का ऊर्जा क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से साधक और उसके परिवार को प्रभावित करता है। फ्लैट में भी आंतरिक व्यवस्था सुधारकर दोष निवारण किया जा सकता है।

भवन का एक साधारण हाथ से बना नक्शा, जिसमें उत्तर दिशा (North) और मुख्य द्वार, रसोई, शौचालय तथा शयनकक्ष की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शायी गई हो।