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शिव साधना: संकटमोचक एवं शांतिदायिनी सरल विधि

भगवान आशुतोष की सात्विक उपासना, महामृत्युंजय जप एवं जीवन के कष्टों से मुक्ति का मार्ग

भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं। वे 'आशुतोष' कहलाते हैं, अर्थात जो मात्र एक लोटा जल और सच्चे हृदय की पुकार से तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं। शिव साधना से जातक के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और काल का भय भी समाप्त हो जाता है।

शिव साधना के तीन सरल स्तंभ

  • जलाभिषेक: प्रतिदिन प्रातःकाल शुद्ध जल अथवा गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। जल चढ़ाते समय मन ही मन "ॐ नमः शिवाय" पंचाक्षर मंत्र का जप करें।
  • बिल्वपत्र अर्पण: 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।' अखंड तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिवलिंग पर उलटा (चिकना भाग शिवलिंग को छूता हुआ) अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप कटते हैं।
  • भस्म व अक्षत: शिवलिंग पर शुद्ध भस्म (विभूति) और बिना टूटे हुए चावल (अक्षत) चढ़ाने से घर में अखंड लक्ष्मी और आरोग्य का वास होता है।

महामृत्युंजय मंत्र की अमोघ शक्ति

"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
यह मंत्र ऋग्वेद का अत्यंत शक्तिशाली संजीवनी मंत्र है। असाध्य रोगों, अकाल मृत्यु के भय, सर्जरी से पूर्व एवं घोर मानसिक अवसाद में इस मंत्र का नियमित 1 माला जप जीवनरक्षक कवच का कार्य करता है।

आश्रम में रुद्राभिषेक व अनुष्ठान

माँ गुरु आश्रम, डुमरिया घाट में प्रत्येक सोमवार, प्रदोष एवं मासिक शिवरात्रि पर विद्वान साधकों द्वारा जनकल्याण एवं रोग मुक्ति हेतु सामूहिक रुद्राभिषेक संपन्न कराया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रातः काल सूर्योदय के समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके तांबे के लोटे से शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल की अविरल धारा अर्पित करना सर्वोत्तम माना गया है।

महामृत्युंजय मंत्र का जप शुद्ध रुद्राक्ष की 108 मनकों वाली माला से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।
महर्षि आलोक आनंद
लेखक: पूज्य महर्षि आलोक आनंद जी

संस्थापक – माँ गुरु आश्रम, डुमरिया घाट (गोपालगंज, बिहार)

शिव तत्व, महाकाल उपासना एवं सात्विक वैदिक अनुष्ठानों के प्रणेता।