बिहार के गोपालगंज जिले में ऐतिहासिक एवं पौराणिक गंडक (नारायणी) नदी के तट पर बसा 'माँ गुरु आश्रम, डुमरिया घाट' केवल एक स्थान नहीं, बल्कि हजारों साधकों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और साधना का जीवंत केंद्र है।
तपोभूमि की स्थापना और संकल्प
वर्षों तक तीर्थों, घने जंगलों और श्मशानों में कठोर तपस्या तथा 4 जनवरी 1998 के इष्टदेव साक्षात्कार के उपरांत पूज्य महर्षि आलोक आनंद जी ने समाज में आध्यात्मिक चेतना और दुखी मानवता के कल्याण हेतु इस पावन स्थल को चुना। गंडक नदी को शालिग्रामी नदी भी कहा जाता है, जिसका जल स्वतः ही पवित्र और नकारात्मक ऊर्जा का नाशक माना जाता है।
आश्रम की दैनिक साधना व सेवा प्रकल्प
माँ गुरु आश्रम में प्रतिदिन प्रातः काल महामृत्युंजय जप, वैदिक आरती एवं ध्यान सत्र संपन्न होते हैं। इसके पश्चात पूज्य गुरुदेव देश-विदेश से पधारे भक्तों को प्रत्यक्ष परामर्श प्रदान करते हैं:
- वैदिक ज्योतिष व कुण्डली परामर्श: जन्म पत्रिका का सूक्ष्म विश्लेषण और ग्रह दोष शांति।
- हस्तरेखा व मुखाकृति दर्शन: जन्म समय अज्ञात होने पर हाथों की रेखाओं से सटीक मार्गदर्शन।
- मानसिक रोगों में संबल: अवसाद, मिर्गी, माइग्रेन व अनिद्रा से ग्रसित लोगों को ध्यान व सात्विक मंत्र मार्गदर्शन।
- पारिवारिक सद्भाव: दांपत्य विवाद व कलह में निष्पक्ष आध्यात्मिक परामर्श।
आश्रम दर्शन का समय
माँ गुरु आश्रम में प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक श्रद्धालु दर्शन एवं परामर्श हेतु पधार सकते हैं। दूर-दराज से आने वाले भक्तों से अनुरोध है कि वे आने से पूर्व दूरभाष पर सूचना अवश्य दें।